Monday, March 28, 2016

शोर

हर तरफ है शोर शराबा हर तरफ हा हा कर है
देश का माहोल देखकर क्यों अब तू परशान है
वक़्त चुनाव का आता है तू पैसे खूब लेता है
उसके बाद सबसे ज़्यादा तुही तो रोता है

दंगा हो या आगजनी अबे तुझको क्या फर्क है
लुटरह है जो अब तू लूटने दे तू तो बेफिक्र है
तुझसे मतलब ही क्या है सरकार किसीकी भी हो
गली देना, दिन भर रोना , अब इससे क्या है होना

Saturday, February 6, 2016

बहुत मुश्किल है इस दौर में

📌@साइम इसरार के कलम से ✒✒
हर किसी की फितरत में नही है वफादार होना
बहुत मुश्किल है इस दौर मे ईमानदार होना
मिलने को क्या है मिल जायगी हज़ारो तेरे जैसी
फिर भी मुश्किल है तूझ जैसा प्यार होना
माना कोई खासियत नही है साइम में फिर भी
लेकिन बहुत मुश्किल है इस ज़माने में न होते हूये खतागार होना
बने फिरते है सब ईमानदार यहाँ पर लेकिन
बहुत मुश्किल है इस दौर मे भरोसेदार होना

Thursday, February 4, 2016

मनरेगा में मची है लूट

📌✒✒ साइम इसरार के कलम से भिराष्टाचार के खिलाफ आवाज़
📌मनरेगा में मची है लूट📌
गांव के हालात बदलने और लोगों के लिए रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के आज 10 वर्ष पूरे हो गए
उत्तरप्रदेश, बिहार, पंजाब, छत्तीसगढ़, मणिपुर जैसे कई राज्यों में इस योजना के कार्यान्वयन को लेकर भ्रष्टाचार एवं अनियमिताताओं की शिकायतें बाधक के रूप में उभर कर सामने आई है

मनरेगा से कुछ फायदे हुए हैं तो कुछ नुकसान भी हुए हैं ।इस योजना का लगभग 50% पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है सरकार भले ही मजदूरों के खाते में पैसा डालती है लेकिन भ्रष्ट राजनीतिज्ञों और नौकरशाही का गठजोड़ इस पैसे को उनके खाते से निकलवा कर बंदरबांट कर लेता है मनरेगा में जो 40% सामग्री अंश है असली भ्रष्टाचार उसमें होता है, रेता, बजरी, पत्थर ,सीमेंट आदि सामग्री के वाउचर में सामग्री की मात्रा और दरें काफी बड़ा चढ़ा कर दिखाई जाती है माननीय उच्चतम न्यायालय को इस पर अपने स्तर पर कार्यवाही करने की आवश्यकता है क्योंकि कुछ अपवादों को छोड़कर राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं लिये के यह योजना दुधारू गाय है

Saturday, January 16, 2016

सदियो पहले

तेरे बिना आज भी वो शक्स जिन्दा है
पैदा जो हुआ था  सदियो पहले

तुम्हारी खुशबु आज तक ज़िंदा है
जो फूल सूख गया था सदयो पहले

पुरानी किताब हर वो पन्ने महकता है
जो तुमने छुए थे सदियो पहले

तेरी उंगलियो के निशा ज़िंदा है आज भी
कलम जो पकड़ा था साइम का सदियो पहले

तेरी वो नज़रो की चमक आज भी चमकती है अंधेरो मे
जो रौशन हुयी थी सदियो पहले

शायद तुम भूल गयी हो वो बाते
जो हुयी थी सदियो पहले

Thursday, December 24, 2015

मै इस देश का किसान हूँ

@साइम इसरार की कलम से

किसान का यह हाल देखकर शर्मिन्दा क्यों नही होते
क़र्ज़ में डूब आत्म हत्या करता फिर भी तुम चुप हो रहते
देश विकास कररहा है आकडे तुमने देखे होंगे
उसके खेतो बंजर होते तुमने शायद देखे होंगे
दावे बड़े बड़े हो करते कुछ तो उनके लिये काम करो
थोडा उनके परिवारो का भी कुछ तुम अब ख्याल करो
सूखे की खातिर क़र्ज़ मे डूबा है
आत्म हत्या करने को मजबूर खड़ा है वाही किसान
राजनीति सब करते हो तुमको किसने रोक है
क्या तुम अन्धे हो हालात नही दिखते है
सही मूल फसल के उसको कहा मिलते है
साइम
अब तुम इन्तिज़ार करो वक़्त बदलने वाला है
तख़्त बदलने को है अब समय बदलने वाला है

Monday, November 9, 2015

में पाकिस्तान क्यों जाऊ @साइम इसरार

मोहब्बत इस मुल्क से है हमको
कबतक तुमको समझाऊ
इस वतन से में क्यों जाऊ
तुमको जाना है साध्वी
तो तुम चलिजाओ
मै अपने मुल्क को छोड़कर क्यों पाकिस्तान चला जाऊ।।।
यह तुम्हारी निगह हमपर शक क्यों करती है
बात बात पर हमको देश द्रोही क्यों कहती है
गलत हम नही तुम हो यह कैसे समझाऊ
तुमको जाना है साक्षी तो तुम चलिजाओ
मै अपना मुल्क छोड़कर क्यों पाकिस्तान चला जाऊ।।।
हमारी वफ़ा दारी पर तुम शक करते हो
हमको ही तुम आतंकवादी कहते हो
तुम्हे परशानी हो आधित्यन्त तो तुम चले जाओ
मै अपना हिन्दुस्तान छोड़कर क्यों चला जाऊ।।।

Sunday, November 8, 2015

बिहार में बहार हो नीतीश कुमार हो

दिल्ली से गद्दी सरकी थी
अब यह बिहार भी हार गया
साम्प्रदायिकता के चक्कर में
यह बड़बोला हरगया