Thursday, December 24, 2015

मै इस देश का किसान हूँ

@साइम इसरार की कलम से

किसान का यह हाल देखकर शर्मिन्दा क्यों नही होते
क़र्ज़ में डूब आत्म हत्या करता फिर भी तुम चुप हो रहते
देश विकास कररहा है आकडे तुमने देखे होंगे
उसके खेतो बंजर होते तुमने शायद देखे होंगे
दावे बड़े बड़े हो करते कुछ तो उनके लिये काम करो
थोडा उनके परिवारो का भी कुछ तुम अब ख्याल करो
सूखे की खातिर क़र्ज़ मे डूबा है
आत्म हत्या करने को मजबूर खड़ा है वाही किसान
राजनीति सब करते हो तुमको किसने रोक है
क्या तुम अन्धे हो हालात नही दिखते है
सही मूल फसल के उसको कहा मिलते है
साइम
अब तुम इन्तिज़ार करो वक़्त बदलने वाला है
तख़्त बदलने को है अब समय बदलने वाला है

Monday, November 9, 2015

में पाकिस्तान क्यों जाऊ @साइम इसरार

मोहब्बत इस मुल्क से है हमको
कबतक तुमको समझाऊ
इस वतन से में क्यों जाऊ
तुमको जाना है साध्वी
तो तुम चलिजाओ
मै अपने मुल्क को छोड़कर क्यों पाकिस्तान चला जाऊ।।।
यह तुम्हारी निगह हमपर शक क्यों करती है
बात बात पर हमको देश द्रोही क्यों कहती है
गलत हम नही तुम हो यह कैसे समझाऊ
तुमको जाना है साक्षी तो तुम चलिजाओ
मै अपना मुल्क छोड़कर क्यों पाकिस्तान चला जाऊ।।।
हमारी वफ़ा दारी पर तुम शक करते हो
हमको ही तुम आतंकवादी कहते हो
तुम्हे परशानी हो आधित्यन्त तो तुम चले जाओ
मै अपना हिन्दुस्तान छोड़कर क्यों चला जाऊ।।।

Sunday, November 8, 2015

बिहार में बहार हो नीतीश कुमार हो

दिल्ली से गद्दी सरकी थी
अब यह बिहार भी हार गया
साम्प्रदायिकता के चक्कर में
यह बड़बोला हरगया

बिहारियों का इतिहास रहा है । जब इन्होंने सिकंदर को हरा दिया था तो फिर ये बीजेपी क्या चीज़ है ।


दिल्ली गयी बिहार गया।
कि वो बड़बोला हार गया।
गलती तो आखिर तुम्हारी ही है इतना परशान करा है अल्पसंख्यक वोटर को तो यह होना ही था अब पूरे देश में बीजेपी के खिलाफ माहोल हो रहा है यही वजहा है के
अबकी बार महागठबंधन का बिहार.....
देशभर के सभी कांग्रेस/आरजेडी/जेडीयू कार्यकर्ताओ को बिहार में एक अच्छी और सफलतापूर्वक जीत दर्ज करने के लिये बहुत-बहुत बधाईया।
मोदीजी चाहे बिहार को डेढ़ करोड़ का पैकेज देने की बात करे पर बिहार की जनता ये जानती है की देश में पिछले डेढ़ साल में कितना विकास हुआ है उसी के आधार पर लोगो ने अपना मत प्रस्तुत किया है
आज का दिन कुछ हट के है यानी ख़ास है
जो लोग नफरत के पुजारी थे उन लोगो के लिए आज का दिन मातम लेकर आया है
जो लोग मोहब्बत और इंसानियत से प्यार करते हैं उन लोगो के लिए आज का दिन ख़ुशी ले कर आया है
अहंकार तो रावण का भी नहीं रहा था ,अमित शाह और गिरिराज सिंह जैसे लोगों की क्या बिसात है अब तक यह सबको पाकिस्तान जाने की सलहा देते थे अब इन साध्वी साक्षी और गिररीराज जी का क्या होगा सब बड़ बोले नेता तो गिरगये
यह जीत केवल बिहार की जनता की नही है यह उन तमाम देशवासियों की जीत है जिनके साथ भाजपा की पार्टी ने छल करके झूठे सपने दिखाकर देश की सत्ता हासिल की यह उन झूठे वादों  पर देश की जनता की जीत है जिन वादों पर भाजपा सत्ता पर काबिज हूई यह जवाब है देश की जनता का केवल भाषणों से काम नही चलेगा जमीन पर काम करना पडेगा सभी देशवासियों को इस जीत की बधाई हो

Thursday, October 29, 2015

तुम्हारी याद

कुछ वादा ए वफ़ा याद है
कुछ भुलादिये हमने
कुछ ज़िन्दगी के भूले किस्से
सबको सुनादिये हमने

तुम्हारी यादो को आज
तक साथ रखा है लेकिन
आज उन खातो को
खाक में मिला दिये हमने

तुम्हारी यह ज़िद तुम्हे
तनहा न करदे
बस इस ख्याल ने आज
फिर झुक दिया हमने

Saturday, October 24, 2015

अबकी बार चुनावो मे

कैसा यह माहोल बना है
     अब नफरत का बाज़ारो मे
भोली जनता भूकी मर रही है
    अब नयी सदी के अंधकारों में
कभी गाय का मुद्दा है
     कभी हिंदुत्व का लेते सहारा
  जनता भूकी मर रही है
      कैसा यह विकास का नारा
माहोल देश का बिगाड रखा है
   कुछ सियासत के आकाओ ने
साइम कई शहर जला डाले है
     इन बड़ बोले नेताओ ने
कैसी नफरत पैदा करदी
   भाई भाई को लड़वाने मे
खून बहरहा है सड़को पर
     इस नयी सदी के चुनावो मे

Thursday, October 22, 2015

शिक्षा ही एक मात्र समाधान है @साइम इसरार के कलम से

शिक्षा ही एक मात्र समाधान है
@साइम इसरार के कलम से ####
आज कल देश का माहोल बिगड़ने की कोशिश क्यों होरही है क्या आपने कभी सोचा है आज जो माहोल है उसका ज़िमेदार कौन है? अगर सच पूछो तो
इस सब के ज़िमेदार हम लोग खुद है क्यों की जब तक हम यह नही मानले की शिक्षा ही एक मात्र हल है तब तक इस समाज का कुछ नही होसकता जब तक हम लड़के और लड़की को एक बराबर नही मानेगें तब तक अपने बच्चों का भविष्य नही सम्हालेंग तब तक यही हॉल रहनेवाला है आखिर हमारी सोच में फर्क क्यों है लड़के को उच्च शिक्षा और लड़की को सिर्फ 12 वी तक ही क्या इतनी छोटी है हमारी मानसिकता हमे अपनी सोच को बदलना ही होगा बच्चों को शिक्षा का यह मतलब नही की स्कूल से ही काम चल जायेगा बच्चों को समाज में उठना बैठना , लोगो से बात करना और तमीज तहज़ीब पर सोचना होगा हम अपनी पुरानी संस्कृति से दूर जारहे है क्या होगा आने वली नस्लो का  क्यों की आज तक जो भी कुर्सी पर बैठा है उसने समाज को गुमरहा ही करा है अगर सब पढ़ लिख जाओगे तो इन नेताओ के पीछे कोन घूमेगा कोन इनकी जय जय कार करेगा और इनका सबसे ज़रूरी मुद्दा भी ख़त्म होजायेगा  सबसे बड़ी परशानी इन्हे ही होगी क्यों की हिन्दू मुस्लिम राजनीती ख़त्म होजायेगी और यह बेचारे बेरोज़गार होजाएंगे शिक्षा ही एक मात्र विकल्प है अगर हम चाहते है हमारे बच्चे इस दहशत की जिंदिगी से महफूज़ रहे तो सोचो कही बहुत देर ना होजाये और आखिर
कब तक यू ही धर्म के नाम पर हम लड़ते रहेंगे कब तक सड़को पर खून बहता रहेगा कभी दादरी मे अख़लाक़ कभी फरीदाबाद मे दलित मासुम बच्चों को ज़िंदा जला दिया जाता है आखिर कब तक ये सरकार मुआबजा देकर गरीबो का मजाक बनाती रहेगी कोई भी घटना हो सरकार केवल मुआबजा देकर अपना पल्ला झाड़ देती है क्या ये मुआबजा ही उन पीड़ित लोगो के लिए काफी है क्या सरकारे इन घटनाओ के लिये जिम्मेदार नहीं है

बुझाकर बेवजह दीपक बहोत खुश आंधियाँ होगी,
मगर फिर आग के शोलों से रौशन बस्तियाँ होगी।
@साइम इसरार के कलम से